
पेटरवार (बोकारो):पेटरवार प्रखंड के चलकरी उतरी एवं चलकरी दक्षिणी पंचायत के विस्थापितों की एक अहम ग्राम सभा रविवार को चलकरी उच्च विद्यालय के प्रांगण में सम्पन्न हुई। ग्राम सभा में सैकड़ों की संख्या में विस्थापित रैयत और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभा की अध्यक्षता चलकरी उतरी पंचायत के मुखिया अखिलेश्वर ठाकुर, चलकरी दक्षिणी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि दुर्गा मांझी तथा विस्थापितों की ओर से भुवनेश्वर केवट की संयुक्त अध्यक्षमंडली ने की।
ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह स्पष्ट निर्णय लिया गया कि जब तक सीसीएल प्रबंधन द्वारा चलकरी उतरी और दक्षिणी पंचायत के विस्थापितों को बिजली, पानी, नौकरी और मुआवजा सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में सोलर पावर प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा।
सभा को संबोधित करते हुए विस्थापित नेता काशीनाथ केवट ने कहा कि लगभग 44 वर्ष पूर्व डीआरएंडआरडी परियोजना के नाम पर अधिग्रहित जमीन पर आज तक न तो परियोजना शुरू हुई और न ही विस्थापितों को उनका अधिकार मिला। अब उसी भूमि पर सीसीएल प्रबंधन द्वारा सोलर प्लांट लगाने की पहल की जा रही है, जो विस्थापितों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि विस्थापित रैयत अपने बकाया नौकरी और मुआवजे की मांग कर रहे हैं और प्रबंधन को अपनी हठधर्मिता छोड़कर न्यायोचित मांगों को स्वीकार करना चाहिए।
विस्थापित प्रतिनिधि भुवनेश्वर केवट ने आरोप लगाया कि सीसीएल प्रबंधन वार्ता के दौरान गुमराह करने वाले तर्क दे रहा है, जिसे ग्राम सभा ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह विस्थापितों को ठगने की एक और कोशिश है।
जिला परिषद सदस्य अशोक मुर्मू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक रैयतों को नौकरी और मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक चलकरी में सीसीएल का कोई भी कार्य नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर शीघ्र ही मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा।
मुखिया अखिलेश्वर ठाकुर एवं मुखिया प्रतिनिधि दुर्गा सोरेन ने कहा कि विकास के नाम पर पहले डीआरएंडआरडी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहित की गई और बाद में परियोजना को ठंडे बस्ते में डालकर विस्थापितों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्राम सभा में अशोक मंडल, भरत मंडल, शिरोमणि मंडल, माणिक मंडल, वाजिद अंसारी, मनिरुद्दिन अंसारी, सुरेश ठाकुर, राज केवट, चुनीलाल केवट, जमाले बारिश, रकीब अंसारी, होपना मांझी, राजाराम सोरेन, किशोर सोरेन, लालेश्वर टुडू, सुरेश मांझी, टिंकू रजक, निमाय चंद्र मंडल सहित कई ग्रामीणों ने अपने विचार रखे।
चर्चा के बाद तीन प्रस्तावों के माध्यम से आम सहमति और विरोध की प्रक्रिया अपनाई गई। पहले प्रस्ताव में बिना बिजली, पानी और नौकरी दिए सोलर प्लांट लगाने की अनुमति देने का प्रश्न रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया। दूसरे प्रस्ताव में यह तय किया गया कि यदि सीसीएल प्रबंधन बिजली, पानी, नौकरी, अनुपयोगी भूमि का क्षतिपूर्ति तथा डीनोटिफिकेशन की लिखित गारंटी देता है, तभी सोलर प्लांट लगाने की अनुमति दी जाएगी। इस पर सभी विस्थापितों ने सर्वसम्मति जताई।




